Monday, February 13, 2012

******************मोहब्बत एहसासों का एतवार है**********************

मोहब्बत एहसासों का एतवार है 
किसी से तुम्हे प्यार है किसी से हमे भी प्यार है 
पर किसे पता कौन खुद्दार है और कौन गद्दार है 
किसी का दिल जले किसी की रूह रोये 
इसकी किसे परवाह है
उन्हें तो बस अपनी अदाओ से प्यार है 
.मोहब्बत एहसासों का........
 वो दौर और था जब इसके माएने कुछ और थे 
वसूलो और भावनाओं की क़द्र होती थी 
परवाह नहीं एक दूजे से दूर या करीब थे 
वो तो प्यार था मगर आज ये एक व्यापर है 
मोहब्बत एहसासों का ...........
दुहाइआ सब देते खुद को आजमाने की 
मिटने और मिटने की 
पर ये हौसले दीखते है सिर्फ अफसानो में 
जाने कितने वक़्त गुजर गए बेजान बहानो में  
फिर भी न जाने क्यों इस एहसास के लिए ही दिल बेकरार है
मोहब्बत एहसासों का ............
वक़्त की तालीम तो मिलती है इन अनजान राहों में 
तब भी आ जाते बेबसी और लाचारी की बाहों में 
डगमगाने का डर तो है पर जीत का विश्वास भी 
आगाज के बुनियाद पर हर बार निर्भर नहीं होता अंजाम यहाँ 
फिर भी इस की चाहत बार बार है 
मोहब्बत एहसासों का एतवार है

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