Monday, April 2, 2012

*******अबूझ पहेली*******

कैसी अबूझ पहेली है ये जिंदगी
कभी किसी के साथ तो कभी अकेली है ये जिंदगी 
आता है गमो का दौर भी जिसे खुशियों से है मिटाना 
अरमानो को है पलकों पे सजाना 
हर कीमत पे हो सफ़र ये सुहाना 
कभी बिछड़ा यार तो कभी सच्ची सहेली है ये जिंदगी 
कैसी अबूझ ..........................
है कठिन रह लेकिन उस पार है जाना 
मुश्किलों के बयार को चीर है अपना कीर्तिमान बनाना 
कभी राह आसन तो कभी कंटीली भी है जिंदगी
कैसी अबूझ..........................
किसी मोड़ पे होता सुखद एहसास तो कभी मिलता काँटों का ताज 
कठिनाइयो के भंवर को पर कर बनना है सरताज 
नाउमीदी का दामन छोड़ उम्मीद की किरणों को बुलाना है पास 
कभी अलसाई दोपहरी तो कभी शाम मस्तानी है ये जिंदगी
कैसी अबूझ ...........................
कभी मिलती सफलताए अपर तो कई बार झेलना पड़ता हार का वार
विपरीत बयार में भी हो हौसला बुलंद जीवन का यही मूल मंत्र 
कभी कर्कश आवाज़ तो कभी तान सुरीली है ये जिंदगी 
भले ही अबूझ पहेली हो लेकिन  बड़ी ही प्यारी है ये जिंदगी 

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