Wednesday, February 16, 2011

ek chehra

        ********** एक चेहरा*********

एक चेहरा जो ऑरों को हसना सिखलाता है 
गम के अंधेरो में भी खुशियों की अलख जगाता है 
बाधाओं के बाढ़ को भी हंस कर पर करना जिसे आता है 
एक चेहरा ....................
मुख मंडल पे  कभी कभी आक्रोश की आकृति भी  उभरती है
गुस्से में लाल चेहरे की भाव भंगिमा दिखती है 
बड़ी संजीदगी इसे हंसी में बदलना जिसे आता है 
एक चेहरा ....................
प्रबल इच्छाशक्ति जिसकी अभिलाषा है 
कार्यो में जिसके समर्पण भाव नज़र आता है
उम्मीद की किरणों जिसने बरबस अपनी और खींचा है
जिंदगी का हर क्षण जिसे नई सिख देता है 
एक चेहरा..................
जिंदगी हद मोड़ पर  इम्तहान लेने को खड़ी है
उस इम्तहान के इंतजार में वो खड़ी है 
आखो में थोड़ी सी झिझक पर  मन में अडिग विश्वास झलकता है
मुश्किलों के थपेड़ो से कश्ती को किनारा करना जिसे आता है 
एक चेहरा जो औरो को हँसना सिख्लता है.
 





Monday, February 14, 2011

vailentine banam vasant

विचार चौक मे आज जिस मुद्दे पर अपनी विचार को अभीव्यक्त कर रहा हूँ बड़ा ही पापुलर है , खास कर इन दिनों, ये अलग बात है की कुछ लोग मेरे विचार से सहमत होंगे और कुछ नहीं . वैसे भी ये आम बात है किसी भीं मुद्दे पर सब लोग एकमत नहीं हो सकते.पर क्या करे जनाब विचार चौक है तो विचार तो देने ही होंगे . चलिए अब टू दी पॉइंट बात करते है ,जिस मुद्दे पर विचार चौक में विचारों का पुलिंदा परोस रहा हूँ वो किसी खास दिन के बारे में है , अब लगभग सीन  क्लेअर हो गया होगा ....जी हाँ मे बात कर रहा हूँ vailentaine डे के बारे में .लगभग एक दशक से लोग इस शब्द से ज़यादा फमेलिएर हुए है. जब मे स्कूल मे पढता था उन दिनों कुछ सिनिएर्स इसके बारे में पूछ कर मज़ा लेते थे जैसे "vailentine डे पे किसको प्रपोज कर रहे हो", vailentine डे पे कहाँ जा रहे हो .......जब मतलब पूछता तो हस्ते हुए उत्तर मिलता कुछ दिनों बाद सब समझ जाओगे .फिर क्या था मै इसकी गहराई और मतलब समझने का अथक प्रयास करता पर असफल रहता .खैर वो दिन भी आया जब इसका मतलब समझ में आने लगा और तब से लेकर आज तक हर वर्ष इस खास दिन क्या होने वाला पता पहले से होता है मसलन कई जोड़े की पिटाई हुए,जबरन शादिया हुए तोड़फोड़ हुआ.
       जैसा की इसका नाम ही अंग्रेजी पन का एहसास करता है आम तोर पर विदेशो में इसे मनाया जाता था लेकिन इन दिनों हमारे देश में इसका प्रचालन काफी बढ़ा हुआ है .आजकल कुछ लोग इसे status  सिम्बल  भी मान ने लगे है .
वैसे vailentine  डे मानाने वालो से मेरा कोई विरोध नहीं है ,न ही मै उन ल्कोगो का समर्थन करता हूँ जो इस दिन उत्पात मचाते है और भारतीय संसकिरती को बचने का झूठा दंभ भरते है .लेकिन इतना ज़रूर है की जिस तरीके से इस दिन को मनाया जाता हैं , वो बहूत ही अच्छा  नहीं कहा जा सकता मसलन किसी पार्क या रेस्टुरेंट में खुले तोर पर प्यारकी नुमाइश करना  .ऐसा नहीं है की हमारी संस्कृति में प्यार के इस उमंग और उल्लास की अनुभूति के लिए दिन नहीं है , पूरा का पूरा एक महिना इस मस्ती के नाम किया गया है जिसे वसंत कहते है.वसंत ऋतू जिसका हर पल नयेपन का एहसास करता है ,जिस से रोम रोम पुलकित और रोमांचित होता रहता है , जो की ज्यादा बेहतर है प्यार का एहसास करवाने और पाने के लिए .
   वैसे आप सभी विचार प्रबुद्ध लोग बेहतर समझ सकते हैं की कौन बेहतर विकल्प है "रोज डे" से शुरू होकर vailentine  डे पर ख़त्म होने वाला प्यार की अभिव्यक्ति या वसंत ऋतू का हर वो रोमांचकारी पल जो प्रेम और मस्ती के एहसास से लबरेज़ रहता है.





Tuesday, February 8, 2011

अमित के ब्लॉग पर आपका स्वागत है